अहंकार के पीछे जब प्रेम खो जाता है: माँ से जुड़ी एक सच्चाई जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं परिवारों में तनाव हमेशा किसी बड़ी वजह से नहीं आता। कई बार ये उन छोटे-छोटे लम्हों में पनपता है जहाँ धैर्य की जगह घमंड आ जाता है, करुणा की जगह नियंत्रण, और प्रेम की जगह अहंकार बोलने लगता है। और सबसे ज़्यादा तकलीफ़देह वो पल होते हैं, जब ये सब एक माँ के साथ होता है—उसके साथ जिसने जीवन भर बिना कुछ माँगे, सब कुछ दे दिया। 💰 उन्हें अपने पैसों पर अधिकार दें, दोष नहीं चाहे वो अपने पैसों से कोई तोहफा लें, मंदिर में दान करें, किसी को सहायता दें या अपने बच्चों को कुछ दे दें—हर बार उनसे सवाल करना या उन्हें रोकना ज़रूरी नहीं होता। कई बार लोग कह देते हैं, "उसे पैसे क्यों दिए? वो तो लौटाएगा भी नहीं।" लेकिन शायद उस माँ ने पैसे मदद के लिए दिए थे, न कि वापसी की शर्त पर। जो महिला जीवन भर सबके लिए खर्च करती रही, क्या उसे अपने ही पैसों पर आज़ादी नहीं मिलनी चाहिए? उसे हर खर्च के लिए सफाई देने को मजबूर करना सिर्फ़ उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाता है। 💸 जब वो 'ना' कहे तो समझने की कोशिश करें कभी-कभी ...